मलय सिंह की वापसी पर खत्म हुआ छात्रों का आंदोलन, कांडी में तनाव के बीच मानी गई मांग

कांडी में सड़क जाम से थाना परिसर तक हंगामा, शिक्षा विभाग ने शिक्षक को दोबारा हाईस्कूल में पदस्थापित करने का लिया फैसला
गढ़वा (जनहित न्यूज लाइव)। कांडी प्रखंड में शिक्षक मलय कुमार सिंह के तबादले के विरोध में छात्र-छात्राओं का चल रहा आंदोलन गुरुवार को शिक्षा विभाग द्वारा मांग स्वीकार किए जाने के बाद समाप्त हो गया। विभाग ने मलय सिंह का तबादला रोकते हुए उन्हें दोबारा कांडी उच्च विद्यालय में पदस्थापित करने का निर्णय लिया है। शिक्षक की वापसी की खबर मिलते ही छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई। हालांकि आंदोलन के दौरान छात्रों, जनप्रतिनिधियों और पुलिस के बीच हुए विवाद के कारण पूरे दिन क्षेत्र का माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
शिक्षक के तबादले के विरोध में सड़क जाम
गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं कांडी उच्च विद्यालय पहुंचे और मलय सिंह का तबादला रद्द कर उन्हें विद्यालय में वापस लाने की मांग को लेकर कांडी-भवनाथपुर मुख्य सड़क को जाम कर दिया। छात्रों का कहना था कि शिक्षक के तबादले से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है और वे किसी भी कीमत पर अपने शिक्षक की वापसी चाहते हैं।

छात्रों को समझाने पहुंचे प्रखंड प्रमुख पिंकू पाण्डेय के साथ इसी दौरान विवाद हो गया। छात्रों ने आरोप लगाया कि उनके साथ मारपीट की गई। इसके बाद आक्रोशित छात्र कांडी थाना पहुंचे और मामले में कार्रवाई की मांग करने लगे। थाना परिसर में भी हंगामे और पथराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। घटना में एक पुलिस पदाधिकारी के चोटिल होने की बात सामने आई है।
वीडियो कॉल पर हुई शिक्षक से छात्रों की बात
इधर, छात्रों की एक टीम अधिकारियों और पुलिस पदाधिकारियों के साथ बातचीत कर रही थी। इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि शिक्षा विभाग ने मलय सिंह का तबादला रोककर उन्हें दोबारा कांडी उच्च विद्यालय में पदस्थापित करने का फैसला किया है। यह खबर मिलते ही छात्रों ने खुशी जताई।

अधिकारियों की मौजूदगी में छात्रों की शिक्षक मलय सिंह से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत भी कराई गई। कांडी बीडीओ राकेश सहाय ने बताया कि छात्रों की मांग विभाग ने स्वीकार कर ली है और मलय सिंह जल्द ही कांडी उच्च विद्यालय में दोबारा योगदान देंगे।
प्रखंड प्रमुख ने आरोपों से किया इनकार
वहीं, प्रखंड प्रमुख पिंकू पाण्डेय ने छात्रों के साथ मारपीट के आरोपों से साफ इनकार किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी छात्र के साथ मारपीट नहीं की है। उनका दावा है कि उनकी गाड़ी पर स्थानीय विधायक से जुड़े लोगों ने हमला किया।
दूसरी ओर, छात्र कथित मारपीट के मामले में कार्रवाई की मांग पर अब भी कायम हैं। शिक्षक की वापसी के फैसले से आंदोलन तो समाप्त हो गया, लेकिन विवाद से जुड़े आरोपों को लेकर प्रशासन के सामने मामले की जांच और स्थिति सामान्य बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है।



