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बाबा विश्वकर्मा मंदिर निर्माण को लेकर समाज की बैठक, 17 सितंबर की पूजा की तैयारियों पर भी हुई चर्चा

विश्वकर्मा परिवार अपने प्रतिष्ठानों में पूर्व की भांति करेंगे पूजा अर्चना, समाज की ओर से नहीं होगा सांस्कृतिक कार्यक्रम : सुरेंद्र विश्वकर्मा

प्रशासन से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के सम्मान में विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर जिले में कोई भी सांस्कृतिक कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं देने की मांग

गढ़वा। बाबा विश्वकर्मा मंदिर निर्माण को लेकर विश्वकर्मा समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक गुरुवार की शाम में मंदिर निर्माण स्थल कल्याणपुर के गौरीटीकर में आयोजित की गई। समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र विश्वकर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में मंदिर निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने तथा निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने समेत अन्य बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में विश्वकर्मा समाज के सदस्यों ने मंदिर निर्माण को समाज की एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए इसे आगे बढ़ाने को लेकर विचार-विमर्श किया। उपस्थित लोगों ने मंदिर निर्माण कार्य को सामूहिक सहयोग से आगे बढ़ाने तथा आगामी विश्वकर्मा पूजा को लेकर आवश्यक तैयारियों पर आपसी समन्वय के साथ कार्य करने पर जोर दिया। इसकी जानकारी देते हुए सुरेंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि कमिटी की ओर से इस वर्ष विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर समाज के लोग पूर्व की भांति अपने-अपने प्रतिष्ठानों में पूजा अर्चना करेंगे परंतु किसी भी प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जाएगा। यह निर्णय झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री एवं विश्वकर्मा समाज के सम्मानित सदस्य रहे स्वर्गीय सुदिव्य कुमार सोनू के आकस्मिक निधन पर शोक एवं श्रद्धांजलि व्यक्त करने के उद्देश्य से लिया गया है। साथ ही उन्होंने प्रशासन से जिले में किसी भी प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम की अनुमति नहीं देने का मांग किया है।
बैठक के अंत में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उपस्थित लोगों ने दिवंगत नेता के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए उनके निधन को दुखद बताया तथा 2 मिनट का मौन धारण कर बाबा विश्वकर्मा से दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिजनों को दुख सहने का शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की गई। संचालन सुनील कुमार विश्वकर्मा के द्वारा किया गया।

बैठक में मुख्य रूप से लक्ष्मी विश्वकर्मा उपेंद्र विश्वकर्मा, राम मिलन विश्वकर्मा, बबलू विश्वकर्मा, अवधेश कुमार, सोमनाथ विश्वकर्मा, विमलेश विश्वकर्मा, श्रवण विश्वकर्मा, अशोक विश्वकर्मा, सुरेंद्र विश्वकर्मा, राजमणि विश्वकर्मा, राम सकल, अजीत, प्रदीप, फूलचंद विश्वकर्मा सहित विश्वकर्मा समाज के कई बुद्धिजीवी, पदाधिकारी एवं सदस्य शामिल हुए।

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