मुख्यमंत्री ने चुआंडी का पानी पीने पर मजबुर होने की सूचना का लिया संज्ञान : सरकारी तंत्र हुआ रेस, रात दस बजे टैंकर से पहुंचा पानी
करीब 100 मीटर की दूरी पर है चापानल और जलमीनार, पांच दस घर पर चापानल लगाना संभव नहीं : सहायक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग गढ़वा

फॉरेस्ट एरिया के चलते अब तक नहीं लगा चापानला, यहीं झोपड़ी बनाकर अस्थाई रूप से रहते हैं 10-12 घांसी परिवार के लोग : मुखिया
मुख्यमंत्री के संज्ञान में आने पर चापानल लगाने की कवायद तेज
बलराम शर्मा
मेराल । प्रखंड मुख्यालय से महज दो किलोमीटर की दूरी पर बंडा पहाड़ की तलहटी और रेलवे लाइन के बीच में मुसहर परिवार के लिए दर्जनों कॉलोनी बनाकर संजयपुर टोला बसाया गया है। उसी के बगल में फॉरेस्ट एरिया में 10-12 घांसी परिवार के लोग झोपड़ी बनाकर अस्थाई रूप से रहते हैं। पूर्व में यह परिवार संजयपुर के चापानल और जल मीनार से पानी पीते थे जो करीब 100 मीटर की दूरी पर है। वर्तमान में आपसी रंजिश की वजह से घांसी परिवार के लोग पहाड़ की तलहटी में पत्थर के बीच से निकलने वाला पानी से दैनिक कार्य करते थे। गर्मी में जल स्रोत कम होने पर यहां चुआंडी बनने पर जो पानी निकलता है उसी से किसी तरह खाना पीना करते हैं।

बुधवार को सोशल मीडिया पर चुंवाडी से पानी लेने की सूचना पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने फेसबुक अकाउंट पर डीसी गढ़वा को टैग कर लिखा कि संजयपुर ग्राम वासियों को मदद पहुंचाते हुए शीघ्र सूचित करें। मुख्यमंत्री के संज्ञान पर देर शाम में गढ़वा का पूरा सिस्टम रेस हो गया और रात करीब 10:00 बजे तक वहां गढ़वा जिला परिषद के टैंकर से पानी पहुंच गया।

सुबह होते ही पेयजल एवं स्वच्छता विभाग गढ़वा के सहायक अभियंता अपने कनीय अभियंता के साथ संजयपुर पहुंचे और वहां रह रहे घांसी परिवार से बातचीत की तथा 100 मीटर की दूरी पर ही चापाकल और जल मीनार से पानी लेने की बात कही। परंतु घांसी परिवार के लोगों का कहना है कि उस टोला पर हम लोग पानी लेने जाते हैं तो विवाद होता है। सरकार हम लोगों को पानी पीने के लिए सभी झोपड़ी के बीच में एक चापानल लगवा दिया जाए। सहायक अभियंता ने कहा कि पांच दस घर पर एक चापाकल देना संभव नहीं है।

मौके पर पहुंचे मेराल पूर्वी के मुखिया रामसागर महतो ने कहा कि फॉरेस्ट एरिया के चलते इन लोगों के झोपड़ी के बीच में अबतक चापानल नहीं लग पाया है। इन लोग आपसी विवाद के कारण जितना दूरी चुआंडी से पानी लाते है उससे कम दूरी पर ही चापानल और जल मीनार है। फिर भी मुख्यमंत्री के संज्ञान में आने के बाद यहां चापानल लगाने की कवायत तेज हो गई है।



