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शरद पूर्णिमा आज, चांदनी रात में खीर का प्रसाद ग्रहण करने की है परंपरा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात खीर रखने से घर में आती है सुख-समृद्धि : पंडित दिनेश पाठक

बलराम शर्मा 
मेराल। शरद पूर्णिमा का पावन पर्व रविवार को श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। इसी कारण शरद पूर्णिमा की चांदनी में खीर रखने और उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।
मेराल के पुरोहित पंडित दिनेश पाठक के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने और अगले दिन उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की धार्मिक परंपरा है। ऐसी मान्यता है कि इससे आरोग्य, सुख-समृद्धि और सकारात्मकता की प्राप्ति होती है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, शरद पूर्णिमा की चांदनी अमृतमयी मानी जाती है तथा इस अवसर पर भगवान की पूजा-अर्चना और चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व है।

प्रसिद्ध मां शायर देवी धाम में होता है भजन कीर्तन और खीर प्रसाद का वितरण

मेराल प्रखंड मुख्यालय के प्रसिद्ध मां शायर देवी धाम में प्रति वर्ष विशेष पूजा-अर्चना के बाद भजन कीर्तन होता है। साथ ही देर रात्रि खीर प्रसाद का वितरण किया जाता है। पंडित दिनेश पाठक ने बताया कि श्रद्धालु इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और रात्रि में चंद्रमा के उदय होने के बाद खीर का भोग लगाकर उसे चांदनी में रखते हैं। इसके बाद परिवार के सदस्यों के बीच प्रसाद का वितरण किया जाता है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा पर श्रद्धापूर्वक पूजा करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
उन्होंने कहा कि शरद पूर्णिमा केवल धार्मिक अनुष्ठान का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ा विशेष अवसर भी है। इस दिन श्रद्धालु भगवान से परिवार की खुशहाली, उत्तम स्वास्थ्य और सुखमय जीवन की कामना करते हैं।

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