उपायुक्त की सकारात्मक पहल से कुशमाही विवाद का समाधान, ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना समाप्त

प्रशासन ने दोषियों पर कार्रवाई, वन पट्टा मामलों के शीघ्र निष्पादन और सहमति से वृक्षारोपण का दिया भरोसा
बलराम शर्मा
गढ़वा। मेराल प्रखंड के कुशमाही गांव में 26 जुलाई को हुए विवाद के बाद न्याय की मांग को लेकर समाहरणालय परिसर के समक्ष 28 जुलाई से जारी ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना गुरुवार को प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हुई सकारात्मक वार्ता के बाद समाप्त हो गया। उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी पशुपति नाथ मिश्रा की पहल पर आयोजित बैठक में ग्रामीणों की प्रमुख मांगों पर प्रशासन द्वारा सकारात्मक आश्वासन दिए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने धरना समाप्त करने की घोषणा की। इस घटनाक्रम को प्रशासन और ग्रामीणों के बीच संवाद एवं विश्वास बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
जिला समाहरणालय सभागार में आयोजित बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने की। बैठक में कुशमाही गांव के ग्रामीणों एवं उनके प्रतिनिधियों ने
अपनी विभिन्न मांगों से संबंधित ज्ञापन उपायुक्त को सौंपा। उपायुक्त ने मांगपत्र के प्रत्येक बिंदु पर गंभीरता से विचार करते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया। प्रशासन के सकारात्मक रुख के बाद ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया। बैठक के दौरान प्रशासन ने स्पष्ट किया कि विवाद में यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध विधि सम्मत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही वन अधिकार अधिनियम के तहत लंबित व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन पट्टा मामलों का यथाशीघ्र नियमानुसार निष्पादन सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया गया। इसके अतिरिक्त यह भी कहा गया कि वन विभाग भविष्य में सामुदायिक वन पट्टा क्षेत्र में ग्रामीणों की सहमति और समन्वय से ही वृक्षारोपण का कार्य करेगा। घटना में घायल लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तथा उनके समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी भरोसा प्रशासन की ओर से दिया गया।
गौरतलब है कि 26 जुलाई को मेराल प्रखंड के कुशमाही गांव में वृक्षारोपण कार्यक्रम के दौरान विवाद उत्पन्न हो गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि उत्तरी वन प्रमंडल, गढ़वा के रेंज पदाधिकारी प्रमोद कुमार के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ग्राम सभा की पूर्व सहमति के बिना कोरवा समुदाय की रैयती भूमि तथा वन अधिकार अधिनियम, 2006 के अंतर्गत मान्यता प्राप्त व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकार क्षेत्र में बाँस का पौधारोपण कराने पहुंची थी।

ग्रामीणों के अनुसार, जब उन्होंने मौके पर मौजूद पदाधिकारियों से इस संबंध में बातचीत करने का प्रयास किया तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। उनका आरोप है कि विवाद के दौरान कुदाल से हमला किए जाने के कारण केश्वर परहिया एवं बीरेंद्र कोरवा गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका उपचार सदर अस्पताल, गढ़वा में कराया जा रहा है। घटना के बाद ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई, वन पट्टा मामलों के शीघ्र निष्पादन तथा सामुदायिक वन अधिकार क्षेत्र में ग्राम सभा की सहमति से ही वृक्षारोपण कराने की मांग को लेकर 28 जुलाई से समाहरणालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था।
गुरुवार को हुई वार्ता में प्रशासन एवं ग्रामीणों के बीच सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। उपायुक्त द्वारा दिए गए सकारात्मक आश्वासनों के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन पर विश्वास जताते हुए अपना आंदोलन समाप्त कर दिया। इससे जिले में संवाद के माध्यम से विवादों के समाधान की एक सकारात्मक मिसाल भी देखने को मिली।
जिला प्रशासन ने सभी पक्षों से शांति, सौहार्द और आपसी सहयोग बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि पूरे मामले में नियमानुसार निष्पक्ष एवं आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
बैठक में उत्तरी वन प्रमंडल पदाधिकारी अंशुमान, अपर समाहर्ता विकास कुमार राय, जिला कल्याण पदाधिकारी धीरज प्रकाश, अनुमंडल पदाधिकारी कुमार मयंक भूषण, कार्यपालक दंडाधिकारी मो. हुसैन, मेराल अंचलाधिकारी यशवंत नायक, थाना प्रभारी विष्णुकांत सहित ग्राम कुशमाही के बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।




