श्मशान घाट पर छलका जनसहयोग का जज़्बा, अंतिम संस्कार में पहुंचे लोगों ने चंदा जुटाकर ठीक कराया चापाकल

श्मशान घाट पर वर्षों से खराब पड़े चापाकल को देखकर केवल अफसोस नहीं जताया, बल्कि तत्काल जनसहयोग से उसकी मरम्मत भी करा दी
बलराम शर्मा
मेराल। कभी-कभी समाज ऐसे उदाहरण पेश करता है जो यह साबित कर देते हैं कि संवेदनशीलता और एकजुटता किसी भी व्यवस्था की कमी पर भारी पड़ सकती है। शनिवार को मेराल पूर्वी पंचायत के मुख्य श्मशान घाट पर ऐसा ही मार्मिक दृश्य देखने को मिला, जब अंतिम संस्कार में पहुंचे लोगों ने श्मशान घाट पर वर्षों से खराब पड़े चापाकल को देखकर केवल अफसोस नहीं जताया, बल्कि तत्काल जनसहयोग से उसकी मरम्मत भी करा दी।
समाजसेवी एवं पूर्व मुखिया सुषमा कुशवाहा के ससुर तथा शिक्षक विनोद कुमार कुशवाहा के पिता स्वर्गीय अशर्फी सिंह कुशवाहा के अंतिम संस्कार में सैकड़ों लोग श्मशान घाट पहुंचे थे। जहां कई महीनो से चापाकल खराब होने से लोगों ने नाराजगी जताई। इस दौरान मौजूद मुखिया रामसागर महतो ने बताया कि लगभग एक वर्ष पहले ही चापाकल की मरम्मत कराई गई थी, लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा उसे फिर खराब कर दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में पंचायत के पास चापाकल मरम्मत के लिए कोई फंड उपलब्ध नहीं है।

वहीं स्थानीय वार्ड सदस्य ने बताया कि चापाकल करीब दो वर्षों से खराब पड़ा है जिससकी सूचना कई बार विभाग एवं पंचायत को दी गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जब लोगों ने यह सुना कि विभाग और पंचायत दोनों ही फिलहाल असहाय हैं, तो किसी ने शिकायतों का सिलसिला नहीं बढ़ाया। सभी ने मिलकर समाधान का रास्ता चुना। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने प्रति व्यक्ति 20 रुपये का सहयोग देना शुरू किया और देखते ही देखते आवश्यक राशि इकट्ठी हो गई। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होते ही चापाकल की मरम्मत कराकर उसे फिर से चालू करा दिया गया।
यह पहल केवल एक चापाकल की मरम्मत नहीं थी, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदना का प्रेरक उदाहरण भी बनी। ग्रामीणों ने यह संदेश दिया कि यदि समाज एकजुट हो जाए तो छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान स्वयं भी किया जा सकता है।
इस जनसहयोग अभियान में रूपु महतो, देवब्रत मेहता, विनेश मेहता, सुनील मेहता, सियाराम जी, अजय रजक, जितेंद्र रजक, अनुज साह, अर्जुन शर्मा, रंजीत कुमार, मनोज रजक, रामजी कुशवाहा सहित अनेक ग्रामीणों ने सक्रिय योगदान दिया।




