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कंधों पर मां दुर्गा की प्रतिमा लेकर निकले युवा, ताशा पार्टी की धुन पर निकला जुलूस

वर्ष 1958 से स्थापित ऐतिहासिक दुर्गा मंडप की प्रतिमा का विसर्जन, नम आंखों से श्रद्धालुओं ने दी विदाई

बलराम शर्मा 

मेराल। पुरानी बाजार स्थित ऐतिहासिक दुर्गा मंडप में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन गुरुवार को श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ किया गया। युवा विकास मंच के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने प्रतिमा को कंधों पर उठाकर करीब तीन किलोमीटर लंबा जुलूस निकाला। इसमें बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे शामिल हुए। जुलूस पुरानी बाजार से निकलकर बस स्टैंड होते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-39 के रास्ते अस्पताल चौक पहुंचा। यहां अन्य अखाड़ों के साथ मिलनी की परंपरा निभाने के बाद जुलूस उसी मार्ग से लौटते हुए प्राचीन शिव मंदिर के समीप बड़े तालाब पहुंचा। यहां पुरोहित पंडित दिनेश पाठक द्वारा मां दुर्गा की आरती कराई गई, इसके बाद प्रतिमा का विसर्जन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने नम आंखों से मां को विदाई देते हुए अगले वर्ष फिर आने की कामना की।

ताशा पार्टी ने बांधा समां

आधुनिक दौर में डीजे के बढ़ते चलन के बीच युवा विकास मंच ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों को प्राथमिकता दी। बड़े डीजे के बजाय 20-25 युवकों की ताशा पार्टी ने ढोल-नगाड़ों की धुन से जुलूस को भक्तिमय बना दिया। बता दें कि मेराल बाजार का ऐतिहासिक दुर्गा मंडप वर्ष 1958 से स्थापित है। यहां की पूजा परंपरा क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।

गत वर्ष की तरह इस बार भी मंच के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक प्रतिमा को कंधों पर उठाकर विसर्जन जुलूस निकाला। जिसका नेतृत्व युवा विकास मंच के अध्यक्ष मनोज जायसवाल के साथ कृष्ण प्रसाद कुशवाहा, कृष्ण शौंडिक, प्रमोद महाजन आदि ने किया। आयोजन को सफल बनाने में विवेक कुमार कालिया, अमन कुमार, ज्योतिष कुमार, संजीव कुमार, प्रकाश चंद, देवनाथ साव, धनंजय शर्मा, छोटेलाल गुप्ता, सुजीत कुमार, संतान कुमार शर्मा, संतोष शर्मा सहित अन्य सदस्यों ने योगदान दिया। जुलूस में महावीर मंडली के महंत मिथिलेश प्रसाद, रामजी ठाकुर, देवी शरण, अनुज प्रसाद, कृष्ण प्रसाद, भास्कर कुमार, अंबिका साहू, मुरली ठाकुर, नरेंद्र पटवा, रामनाथ ठाकुर, देवेंद्र शर्मा, योगेंद्र प्रसाद, प्रकाश कुमार, सतीश प्रसाद, विनोद कुशवाहा, रामजी प्रसाद सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मां दुर्गा की विदाई के साथ ही पूजा उत्सव का समापन हो गया। श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष मां के पुनः आगमन की कामना के साथ उन्हें भावभीनी विदाई दी।

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