मेराल में विकास की उलटी तस्वीर, बिजली कटने पर फ्लाईओवर के ऊपर सोलर से जगमग और नीचे अंधेरा

यह विडंबना केवल रोशनी की नहीं, बल्कि प्राथमिकताओं की भी है, जहां लोगों की सुरक्षा, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों के लिए पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था की सबसे अधिक आवश्यकता है
बलराम शर्मा
मेराल । संत कबीर दास की उक्ति “आंगन सूखा, घर में पानी” मेराल थाना मुख्यालय की स्थिति पर बिल्कुल सटीक बैठती दिखाई देती है। करीब ढाई किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर के ऊपर बिजली नहीं रहने पर सोलर से लाइटें पूरी रात जगमगाती रहती हैं, जबकि उसी फ्लाईओवर के नीचे, जहां रोज़ाना हजारों लोगों का आना-जाना होता है, बाजार लगता है और सबसे अधिक भीड़ रहती है, वहां अंधेरा छा जाता है। यह विडंबना केवल रोशनी की नहीं, बल्कि प्राथमिकताओं की भी है। जहां लोगों की सुरक्षा, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों के लिए पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था की सबसे अधिक आवश्यकता है, वहीं अंधेरा पसर जाता है। इससे दुर्घटनाओं, चोरी-छिनतई और अन्य अप्रिय घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है।
जनता का सवाल है कि जब फ्लाईओवर के ऊपर सोलर से लाइट जलता है तो नीचे के व्यस्त और आबादी वाले हिस्से को रोशन करने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? विकास का असली उद्देश्य आम नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा होना चाहिए, केवल दिखावटी चमक नहीं।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा है कि वे जनता की इस वास्तविक समस्या पर गंभीरता से ध्यान दें और फ्लाईओवर के ऊपर की तरह ही नीचे भी लाइटें जगमगाते रहे, ताकि मेराल का विकास हर नागरिक के जीवन में उजाला ला सके, न कि केवल ऊपर से चमकता हुआ दिखाई दे।




