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मां शायर देवी धाम महोत्सव के सातवां दिन : सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र नाटक का हुआ मंचन

विपरीत परिस्थिति में भी सत्य मार्ग पर चलने, कर्तव्य और वचन का पालन करने का दिया गया सामाजिक सीख 

बड़ी संख्या में महिला-पुरुष व बच्चे दर्शकों ने देर रात्रि तक जीवंत सांस्कृतिक आयोजन का लुफ्त उठाया

बलराम शर्मा 

मेराल । प्रसिद्ध मां शायर देवी धाम का छठा वार्षिक महोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। महोत्सव के सातवां दिन बुधवार की रात्रि में आजाद नवयुवक संघ छवआना टोला के कलाकारों ने आशुतोष शर्मा के निर्देशन में सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र-तारामती की कहानी का सचित्र मंचन किया। नाटक में राजा हरिश्चंद्र ने सत्य और वचन की रक्षा के लिए अपनी रानी तारामती और पुत्र रोहित तक का परित्याग करने में एक पल भी नहीं सोचा। नाटक के माध्यम से समाज को सत्य मार्ग पर चलते हुए अपने कर्तव्यों का पालन और विपरीत परिस्थितियों में भी दिया हुआ वचन निभाने की सामाजिक सीख दी गई।

बताया गया कि कठिनाइयां अस्थायी है जबकि सच्चाई और समर्पण स्थायी है, जो मानसिक शांति और सम्मान का गौरव प्रदान करता है। गीत संगीत से भरपूर नाटक के अद्भुत मंचन कर कलाकारों ने दर्शकों का मनमोह लिया। नाटक में राजा हरिश्चंद्र का भूमिका सेवानिवृत डाक कर्मचारी रवीन्द्र प्रसाद वर्मा जबकि तारामती का शिक्षक संदीप कुमार, पुत्र रोहित का प्रिंस राज (नन्हा कलाकार), विश्वामित्र का शिक्षक विष्णु कांत प्रसाद, इंद्र का दामोदर कुमार, वशिष्ठ ऋषि का विजय ठाकुर तथा कल्लू डोम की भूमिका मेराल पश्चिम के मुखिया पति मुन्ना राम के अलावे सुनिल राम, अशोक राम, नान्हू यादव, किशु ठाकुर, उपेंद्र शर्मा, सत्य ऋषि आदि ने शानदार अभिनय किया। मंच का संचालन मुख्य संरक्षक संजय भगत और अध्यक्ष विजय प्रसाद के द्वारा किया गया। इस अवसर पर देवी धाम संचालन समिति के मुख्य संरक्षक प्रेमचंद प्रसाद, मोतीचंद प्रसाद, वीरेंद्र प्रसाद, विनोद कुशवाहा, सूर्य प्रकाश सुड्डू, रामप्रवेश गुप्ता, धनंजय चौधरी, रामप्रवेश गुप्ता सहित समिति के अन्य लोगों के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिला-पुरुष व बच्चे दर्शकों ने देर रात्रि तक जीवंत सांस्कृतिक आयोजन का लुफ्त उठाया।

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