झामुमो ने निर्वाचन प्रक्रिया में छेड़छाड़ का लगाया आरोप, प्रशासन ने नियम विरुद्ध कार्रवाई पर कार्रवाई की बात कही

रंका में 108 भरे हुए फॉर्म-7 मिलने से उठे सवाल, एसडीओ ने कहा – बिना सत्यापन नहीं हटेगा किसी मतदाता का नाम
गढ़वा। रंका प्रखंड में बड़ी संख्या में नाम-पते दर्ज फॉर्म-7 मिलने के मामले ने निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर के कल्याणपुर स्थित आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नेताओं ने मामले को गंभीर बताते हुए निर्वाचन प्रक्रिया में कथित छेड़छाड़ का आरोप लगाया और निष्पक्ष जांच की मांग की। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित प्रक्रिया और सत्यापन के बिना किसी भी मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा।
मामले में रंका अनुमंडल पदाधिकारी मोहम्मद परवेज ने बताया कि उन्हें वीडियो के माध्यम से सूचना मिली थी, जिसके बाद वे मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि वहां एक व्यक्ति के पास 108 प्रिंटेड और नाम लिखे हुए फॉर्म-7 मिले। मौके पर बड़ी संख्या में लोग भी मौजूद थे, जिन्हें समझा-बुझाकर वहां से भेजा गया।

एसडीओ मोहम्मद परवेज ने कहा, “वह व्यक्ति बीएलए-2 था। हमने वहां मौजूद लोगों को समझाया कि सिर्फ फॉर्म-7 मिलने से किसी का नाम मतदाता सूची से विलोपित नहीं होता है। विलोपन के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी किया जाता है और संबंधित मतदाता का सत्यापन किया जाता है।”
उन्होंने आगे कहा, “निर्वाचन से जुड़ा कोई भी कार्य नियम के अनुसार ही होगा। नियम से हटकर यदि कोई व्यक्ति, चाहे वह निर्वाचन से जुड़ा हो या आम व्यक्ति, कोई कार्य करता है तो उसके विरुद्ध सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।”
एसडीओ के अनुसार, बड़ी संख्या में भरे हुए फॉर्म मिलने के बाद मौके पर असंतोष की स्थिति उत्पन्न हुई थी। कानून-व्यवस्था को देखते हुए संबंधित व्यक्ति को थाना भेजा गया तथा मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाते हुए कहा, “बिना सत्यापन किसी भी मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा।”
इधर, झामुमो नेताओं ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में पहले से नाम दर्ज फॉर्म-7 तैयार किया जाना निर्वाचन प्रक्रिया में अनधिकृत हस्तक्षेप की आशंका पैदा करता है। पार्टी ने फॉर्म-7 के स्रोत, उन्हें तैयार करने वाले लोगों तथा पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
अब प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा कि 108 भरे हुए फॉर्म-7 किस उद्देश्य से तैयार किए गए थे और उनके पीछे की वास्तविक प्रक्रिया क्या थी। फिलहाल प्रशासन के स्पष्ट रुख के बाद इतना तय है कि सत्यापन और निर्धारित प्रक्रिया के बिना किसी मतदाता का नाम हटाने की कार्रवाई नहीं की जाएगी।



