राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह से न्याय की राह आसान

न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने कहा- अधिकारों की जानकारी के साथ योजनाओं का लाभ धरातल तक पहुंचना जरूरी
गढ़वा। नालसा के निर्देश एवं झालसा के नेतृत्व में शनिवार को गढ़वा व्यवहार न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत-सह-मेगा विधिक सशक्तिकरण शिविर का आयोजन किया गया। अध्यक्षता झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने की। न्यायमूर्ति का आदिवासी परंपरा के अनुसार लोटा-पानी और गीत के माध्यम से स्वागत किया गया। पांच लाभुक महिलाओं ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

शिविर में विभिन्न सरकारी विभागों की ओर से जनकल्याणकारी योजनाओं के स्टॉल लगाए गए। यहां लोगों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ पात्र लाभुकों को मौके पर ही लाभान्वित किया गया। न्यायमूर्ति ने कई लाभुकों के बीच चल-अचल परिसंपत्तियों का वितरण भी किया।

अपने संबोधन में न्यायमूर्ति ने कहा कि केवल अधिकारों की जानकारी होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचना जरूरी है। उन्होंने लोगों से सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और छोटे-मोटे विवादों को विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से सुलझाने की अपील की।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज प्रसाद ने कहा कि लोक अदालत में सुलहनीय आपराधिक मामलों, एनआइ एक्ट की धारा 138, मोटर दुर्घटना दावा, वैवाहिक विवाद, बिजली-पानी, श्रम, भूमि अधिग्रहण, बैंक, वन अधिनियम समेत विभिन्न मामलों का निस्तारण किया जाता है। लोक अदालत में मामलों के निष्पादन पर कोर्ट फीस नहीं लगती और लंबित मामलों में जमा कोर्ट फीस वापस करने का भी प्रावधान है।

उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार जरूरतमंदों को न्याय और उनके अधिकारों तक पहुंच दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। एसपी आशुतोष शेखर ने लोक अदालत को त्वरित, सुलभ और निःशुल्क न्याय का प्रभावी माध्यम बताया। मौके पर न्यायिक पदाधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।


