आखिर कैसे होगा व्यवस्था परिवर्तन

जिसकी जिम्मेदारी है, वही अगर गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाए तो सवाल उठना लाजिमी है…
बलराम शर्मा
मेराल । प्रखंड मुख्यालय में करोड़ों रुपये की लागत से NHAI द्वारा बनाए गए नवनिर्मित फ्लाईओवर की जमीनी हकीकत देखकर सवाल उठता है कि आखिर जनता की सुविधा और सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?

वीडियो / फोटो में साफ देखा जा सकता है कि फ्लाईओवर से बरसात का पानी निकालने के लिए लगाए गए पाइप महज शोपीस बनकर रह गए हैं। करीब 25 फीट की ऊंचाई से पानी सीधे सड़क और आसपास के लोगों के घरों/दुकानों की ओर गिर रहा है। पाइप की डिजाइनिंग और पानी निकासी की व्यवस्था सही नहीं होने के कारण कई जगह पानी इधर-उधर गिर रहा है और जो पानी नीचे पहुंचता है, वह सड़क के बीचों-बीच बहता रहता है।

सवाल यह है कि जब करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं तो पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था क्यों नहीं की गई? पानी को अंडरग्राउंड नाली के माध्यम से निकालने की व्यवस्था होती तो सड़क भी सुरक्षित रहती और राहगीरों को भी परेशानी नहीं होती।
इतना ही नहीं, मेराल मुख्यालय में फ्लाईओवर के नीचे स्पीड रोड बना है जिसके क्रॉसिंग स्थानों पर ब्रेकर और चेतावनी लाइट की व्यवस्था नहीं होने से दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। बस स्टैंड और 10 नंबर पिलर के पास दोनों तरफ पहुंच पथ का निर्माण नहीं होना भी किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है।
हाईवे पर लगी स्ट्रीट लाइटों की स्थिति भी चिंताजनक है। कब जलेंगी और कब बंद रहेंगी इसका कोई भरोसा नहीं। आखिर इन व्यवस्थाओं की निगरानी कौन करता है? संबंधित विभाग या व्यवस्थापक का संपर्क नंबर भी सार्वजनिक होना चाहिए, ताकि आम लोग समस्या होने पर शिकायत कर सकें।व्यवस्था परिवर्तन सिर्फ भाषणों और कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देना चाहिए। जनता टैक्स देती है, करोड़ों रुपये विकास कार्यों पर खर्च होते हैं और बदले में अगर मूलभूत सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था ही सवालों के घेरे में हों, तो जवाबदेही तय होनी चाहिए। संबंधित विभाग से आग्रह है कि इसे महज शिकायत न समझें, बल्कि किसी बड़े हादसे से पहले गंभीरता से संज्ञान लेकर आवश्यक सुधार कराएं। क्योंकि हादसा होने के बाद जागने से बेहतर है – हादसा होने से पहले व्यवस्था को दुरुस्त कर दिया जाए।



