स्कूल बसों में बच्चों की जान से खिलवाड़, 15 सीटर में 32 और 22 सीटर बस में 41 बच्चे मिले सवार, एक चालक मादक पदार्थ का सेवन करते पकड़ा गया

आरके पब्लिक स्कूल हूर में औचक निरीक्षण के दौरान खुली परिवहन व्यवस्था की पोल – फिटनेस, बीमा, परमिट फेल; फर्स्ट एड बॉक्स और जीपीएस भी नहीं
गढ़वा। उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी पशुपति नाथ मिश्रा के निर्देश पर जिला शिक्षा पदाधिकारी जगरनाथ लोहरा और मोटर यान निरीक्षक मनीष कुमार गुप्ता द्वारा गुरुवार को विद्यालय का औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान स्कूल बसों में क्षमता से कई गुना अधिक बच्चों को बैठाकर ले जाने का मामला सामने आया।

15 सीटर बस में 32 बच्चे
निरीक्षण के दौरान वाहन संख्या JH14A-3220 में 15 सीट की क्षमता के बावजूद 32 बच्चे सवार मिले। जांच में बस का प्रदूषण प्रमाण-पत्र, बीमा, फिटनेस और परमिट फेल पाया गया। सबसे गंभीर बात यह रही कि वाहन चालक मादक पदार्थ का सेवन करते हुए पाया गया। बच्चों को सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी वाले चालक की यह स्थिति प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी।
22 सीटर में 41 बच्चों की सवारी
दूसरी बस JH14P-3506 22 सीटर थी, लेकिन उसमें 41 बच्चे सवार मिले। इस वाहन का परमिट भी फेल पाया गया। दोनों वाहनों में बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी फर्स्ट एड बॉक्स और GPS की सुविधा नहीं मिली।
पांच बसों की व्यवस्था, निरीक्षण में दो ही मिलीं
प्रधानाध्यापिका के अनुसार विद्यालय में बच्चों के परिवहन के लिए कुल पांच बसों की व्यवस्था है। हालांकि निरीक्षण के दिन केवल दो बसें संचालित मिलीं। अन्य बसें खराब होने के कारण बंद बताई गईं। वहीं बच्चों के लिए टेंपो की व्यवस्था विद्यालय द्वारा नहीं किए जाने की बात भी सामने आई। अभिभावक स्वयं इसकी व्यवस्था करते हैं।
मान्यता और यू-डाईस पर भी सवाल
विद्यालय की मान्यता और यू-डाईस कोड की स्थिति भी स्पष्ट नहीं मिली। प्रधानाध्यापिका ने बताया कि मान्यता एवं यू-डाईस के लिए आवेदन किया गया है, जो प्रक्रियाधीन है। फिलहाल विद्यालय का संचालन आरके पब्लिक स्कूल, सोनपुरवा के यू-डाईस कोड से किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान विद्यालय संचालन से जुड़े आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
दो दिन में 13 बिंदुओं पर मांगा जवाब
प्रशासन ने विद्यालय प्रबंधन को दो दिनों के भीतर 13 बिंदुओं पर साक्ष्य सहित प्रतिवेदन देने का निर्देश दिया है। इसमें विद्यालय की मान्यता, भवन एवं अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र, पेयजल जांच, शिक्षकों की नियुक्ति व योग्यता, वेतन, भूमि संबंधी अभिलेख तथा सभी बसों के चालक, लाइसेंस, स्वास्थ्य जांच और वाहनों के अद्यतन कागजात शामिल हैं।
जवाब नहीं मिला तो बंद हो सकता है विद्यालय
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि में दस्तावेज और प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराने पर विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ नियमसंगत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही विद्यालय बंद करने के संबंध में उच्चाधिकारियों को प्रतिवेदन भेजा जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता है।




