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प्रखंड कार्यालय पर जल, जंगल और जमीन बचाव को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन 

अंचलाधिकारी ने कहा जिस जमीन के लिए ग्रामीण प्रदर्शन कर रहे हैं उसका जमाबंदी रद्द कर दिया गया है

मेराल । प्रखंड कार्यालय पर सोमवार को बौराहा गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने जल, जंगल और जमीन बचाने को लेकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों ने सीओ यशवंत नायक एवं थाना प्रभारी विष्णुकांत को लिखित आवेदन देकर जल, जंगल और जमीन को बचाने की गुहार लगाई। पदाधिकारी को सौंप गए आवेदन में कहा गया है कि बौराहा गांव के मुड़ली पहाड़ के पास सार्वजनिक भूमि पर बसरीया गांव निवासी लक्ष्मण प्रसाद साह द्वारा जेसीबी मशीन से बल पूर्वक कर रहे खनन तथा ग्रामीण से दुर्व्यवहार करने के लिए कानूनी कार्रवाई करने की मांग किया। ग्रामीणों का आरोप है कि बौरहा गांव के मुड़ली पहाड़ घुटघुरी खाता 58 प्लॉट 405 गैर मजरूआ भूमि ग्रामीणों के सार्वजनिक उपयोग के लिए हमेशा से रहा है। लेकिन बसरीया गांव के लक्ष्मण प्रसाद पिता रामदेव साहू, गणेश कुमार साहू पिता लक्ष्मण प्रसाद साह, राजन प्रसाद साह की पत्नी एवं अज्ञात 14 -15 व्यक्ति जेसीबी मशीन एवं दो बोलेरो पर सवार होकर पहुंचकर बलपूर्वक उक्त जमीन पर खनन कर रहे हैं। ग्रामीणों के मना करने पर लक्ष्मण प्रसाद साह उसके दामाद राजन साह एवं अन्य के द्वारा गाली गलौज तथा धमकी देते हुए ग्रामीण पर पत्थर से वार किया गया। इसके बाद बौराहा गांव के जल, जंगल और जमीन बचाओ संघर्ष समिति के लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दिया। जहां पुलिस के पहुने के बाद ग्रामीणों ने जेसीबी मशीन एवं अन्य वाहन को पुलिस के हवाले कर दिया। ग्रामीणों ने सीओ एवं थाना प्रभारी से उक्त लोगों के विरुद्ध त्वरित कानूनी कार्रवाई करने की मांग किया है। विरोध प्रदर्शन करने वालों में सत्येंद्र मेहता, सुनील महतो, प्रहलाद यादव, राम प्रसाद महतो, जग्गू साह, शत्रुघ्न मेहता, रामचंद्र महतो, मुंद्रिका महतो, आनंद महतो, जितेंद्र कुशवाहा, अशोक कुमार यादव, विजय मेहता, परमेश्वर राम, ब्रह्मदेव पासवान, अनिल मेहता, चंदन कुमार मेहता, सुभाष मेहता, राजपाल राम, कृष्ण प्रसाद यादव, मीना देवी सहित कई लोग शामिल थे।

गलत ढंग से कराया गया जमाबंदी को रद्द करने के लिए भेजा गया था जिसकी स्वीकृति मिल गई है :  सीओ 

जल जंगल और जमीन को लेकर प्रखंड कार्यालय पर कर रहे विरोध प्रदर्शन के संबंध में पूछे जाने पर सीओ यशवंत नायक ने कहा कि 2001 में दूसरे गांव के लोगों द्वारा बौराहा में गैर मजरूआ जमीन की कराई गई थी। आज उसे जमीन पर उक्त लोगों द्वारा कब्जा करने के लिए जेसीबी और ट्रैक्टर लगाया गया था। उन्होंने बताया कि मेरे संज्ञान में आने पर एक वर्ष पूर्व ही अवैध जमाबंदी को रद्द करने के लिए प्रस्ताव बनाकर डीसीएलार के यहां भेज दिया था। जहां से जमाबंदी रद्द करने की स्वीकृति भी मिल गई है।

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