पति-पत्नी के मामूली विवाद के बाद विवाहिता ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, दो मासूम बच्चों के सिर से उठा मां का साया

क्रोध, तनाव या भावनात्मक आवेश में लिया गया फैसला न केवल एक व्यक्ति का जीवन समाप्त करता है, बल्कि पूरे परिवार को जीवनभर का दर्द दे जाता है
बलराम शर्मा
मेराल। थाना मुख्यालय के बस स्टैंड चरका-पत्थर मुहल्ले में पति-पत्नी के बीच हुए मामूली घरेलू विवाद के बाद 24 वर्षीय विवाहिता सौरव कुमार राम की पत्नी दिव्या कुमारी ने कथित रूप से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना मंगलवार देर रात करीब 11 बजे की बताई जा रही है। बुधवार सुबह घटना की जानकारी मिलते ही पूरे मुहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई। मृतका अपने पीछे 3 साल की बेटी और एक के मासूम बेटा को छोड़ गई है, दोनों मासूमों के सिर से मां का साया उठ गया।
परिजनों के अनुसार, रात में पति-पत्नी के बीच किसी घरेलू बात को लेकर कहासुनी हुई थी। इसके बाद विवाहिता अपने कमरे में चली गई। कुछ देर बाद जब परिजनों ने उसे देखा तो वह फंदे से झूलती मिली। आनन-फानन में उसे नीचे उतार कर पहले एक निजी बाद में सरकारी अस्पताल में ले गए तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर सीएचसी में पहुंचकर घटना की जानकारी ली तथा शव को कब्जे में लिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है तथा परिजनों से पूछताछ की जा रही है।
बुधवार सुबह मृतका के मायके और ससुराल पक्ष के बड़ी संख्या में सीएचसी में पहुंचे लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था। मुहल्ले में भी मातम का माहौल बना हुआ है। सबसे अधिक चिंता दोनो मासूम बच्चों को लेकर जताई जा रही है, जो अभी अपनी मां के स्नेह और देखभाल के सबसे महत्वपूर्ण दौर में हैं।
समाज के लिए यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि जीवन की छोटी-छोटी परेशानियों और घरेलू विवादों को आत्महत्या जैसा अंतिम कदम उठाकर हल नहीं किया जा सकता। पति-पत्नी के बीच मतभेद और तकरार हर परिवार में हो सकती है, लेकिन संवाद, धैर्य और परिवार के बुजुर्गों की मध्यस्थता से अधिकांश समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। लोगों का मानना है कि क्रोध, तनाव या भावनात्मक आवेश में लिया गया फैसला न केवल एक व्यक्ति का जीवन समाप्त करता है, बल्कि पूरे परिवार को जीवनभर का दर्द दे जाता है। ऐसे मामलों में परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे की भावनाओं को समझने, मानसिक तनाव की स्थिति में खुलकर बातचीत करने और जरूरत पड़ने पर परामर्श लेने की आवश्यकता है।
इस दुखद घटना ने दो मासूम बच्चों को मां के प्यार से वंचित कर दिया है। समाज को भी ऐसे संवेदनशील मामलों में जागरूकता बढ़ाने, पारिवारिक संवाद को मजबूत करने और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक माहौल बनाने की दिशा में काम करने की जरूरत है।


