मेराल में ‘आपन सरस्वतिया अभियान’ के 17वें दिन भी जारी रहा सफाई अभियान

मंगलवार को स्थानीय दवा व्यवसाईयों के सहयोग से जेसीबी लगाया गया
बलराम शर्मा
मेराल। प्रखंड मुख्यालय स्थित सरस्वतिया नदी के संरक्षण, पुनर्जीवन एवं सौंदर्यीकरण को लेकर चलाए जा रहे जनसहभागिता आधारित ‘आपन सरस्वतिया अभियान’ के तहत मंगलवार को लगातार 17वें दिन भी सफाई अभियान उत्साहपूर्वक जारी रहा। अभियान में स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, व्यवसायियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
सरस्वतिया नदी को अतिक्रमण, गंदगी एवं जलभराव की समस्या से मुक्त कराने के उद्देश्य से चल रहे इस अभियान के तहत नदी तट की सफाई, झाड़ियों की कटाई तथा जल प्रवाह को सुगम बनाने का कार्य किया जा रहा है। अभियान में शामिल लोगों ने श्रमदान कर नदी को पुनः स्वच्छ एवं जीवंत बनाने का संकल्प दोहराया।
अभियान की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन गढ़वा सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संजय कुमार द्वारा दिया जा रहा है। उनके प्रयासों से शुरू हुआ यह जन अभियान अब धीरे-धीरे एक जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है। वहीं, अंचल अधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी यशवंत नायक भी अभियान को धरातल पर सफल बनाने के लिए लगातार लोगों को प्रेरित एवं प्रोत्साहित कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों एवं व्यवसायियों का सहयोग अभियान को नई दिशा दे रहा है।
अभियान का संचालन कर रहे मुखिया रामसागर महतो, विधायक प्रतिनिधि डॉ. लालमोहन, संजय भगत, मुखिया पति मुन्ना राम सहित अन्य लोगों ने कहा कि सरस्वतिया नदी कभी क्षेत्र की जीवनरेखा हुआ करती थी। समय के साथ इसकी स्थिति खराब होती गई, लेकिन अब सामूहिक प्रयासों से इसे पुनर्जीवित करने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि नदी के पुनर्जीवन से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि क्षेत्र के लोगों को जल संरक्षण एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं का भी लाभ मिलेगा।
मंगलवार को स्थानीय दवा व्यवसाईयों के सहयोग से जेसीबी लगाया गया। अभियान से जुड़े लोगों ने कहा कि सरस्वतिया नदी को बचाने की यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। प्रतिनिधियों ने अन्य लोगों से भी अभियान से जुड़ने और नदी संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने की अपील की। लगातार चल रहे श्रमदान और जनसहयोग से अब सरस्वतिया नदी का स्वरूप बदलता दिखाई देने लगा है, जिससे स्थानीय लोगों में उत्साह और उम्मीद दोनों बढ़ी हैं।


