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गढ़वा की राजनीति का केंद्र बिंदु बन गया मेराल प्रखण्ड

क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पार्टी के जिला का कमान मेराल प्रखण्ड के कार्यकर्ताओं के पास

झामुमो, बसपा के बाद सबसे बड़ी पार्टी कहलाने वाली भाजपा का भी जिलाध्यक्ष मेराल प्रखंड के गांव से बने


गढ़वा । जिला मुख्यालय से सटे 77 गांव और 20 पंचायत के ग्रामीण क्षेत्रों वाला मेराल प्रखण्ड अब जिले के राजनीति का केंद्र बिंदु बन गया है। क्योंकि वर्तमान समय में प्रमुख राजनीतिक पार्टियां मेराल प्रखंड के अपने जुझारू कार्यकर्ताओं को जिला का कमान सौंप रही है। पिछड़ेपन का दंश झेल रहा मेराल प्रखंड को यूं ही नहीं सभी राजनीतिक पार्टियां अपने कार्यकर्ताओं को यह जिम्मा दे रही है, बल्कि यहीं से ही जिला सदर विधानसभा के जीत और हार का फैसला करीब तीन दशक से होते आ रहा वोट का कमाल है। गढ़वा विधानसभा का दूसरा सबसे बड़ा प्रखंड मेराल के वोट का समीकरण जिसके पक्ष में जाता है उस पार्टी का ही परचम विधानसभा में लहराता है, जो चुनाव परिणाम के आंकड़ों से भी स्पष्ट होता है। बताते चलें कि रंका गढ़ से ताल्लुक रखने वाले पूर्व विधायक गिरिनाथ सिंह का वोट का गढ़ मेराल ही था। उन्हें एक मध्यावधि चुनाव के साथ चार बार विधानसभा चुनाव में जीत का वोट मेराल से ही मिला था। लगातार जीत के लिए वोट देने वाला मेराल प्रखंड का अपेक्षित विकास नहीं होने का हवाला देकर जेवीएम के टिकट पर पहली बार चुनावी मैदान में उतरे सत्येंद्र नाथ तिवारी ने 2009 में गिरिनाथ सिंह के मेराल का वोट बैंक में सेंध लगाने का काम किया। उन्हें विधानसभा चुनाव में मेराल के एक नंबर बूथ से ही सबसे ज्यादा वोट मिलना शुरू हुआ जो ऐतिहासिक जीत में तब्दील हुआ। 2014 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और बहुत अर्से के बाद यहां भाजपा का प्रत्याशी मेराल के वोट बैंक की बदौलत जीत दर्ज कराई। इधर 2009 और 2014 में झामुमो प्रत्याशी मिथिलेश कुमार ठाकुर चुनाव हारने के बाद मेराल के एक-एक गांव का दौरा कर क्षेत्र की जनता का नब्ज समझा और अपेक्षित विकास का भरोसा देने में कामयाब हुए जिससे दो बार के विधायक रहे सत्येंद्र नाथ तिवारी की भी नीव हिल गई और मिथिलेश कुमार ठाकुर को मेराल प्रखंड से जीत का वोट मिल गया। गढ़वा के इतिहास में यह ऐसा जीत हुआ की पहली बार गढ़वा के विधायक को राज्य सरकार में कैबिनेट मिनिस्टर बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। परंतु 2024 के विधानसभा चुनाव में वोट का ऐसा समीकरण बना की मेराल प्रखंड से भाजपा को दूसरी बार और सत्येंद्र नाथ तिवारी को तीसरी बार ऐतिहासिक जीत के लिए वोट मिल गया। वोट के इसी ध्रुवीकरण में मेराल से बहुजन समाज पार्टी को भी 2000 के दशक में अच्छा वोट मिला, जिससे गढ़वा विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी का जनाधार बढ़ा था। यही कारण है कि अब प्रमुख राजनीतिक पार्टियां मेराल के अपने जुझारू और समर्पित कार्यकर्ता को पार्टी के जिलाध्यक्ष बना रहे हैं। 2024 में चुनाव हारने के बाद झामुमो ने पहली बार मेराल प्रखंड के चामा पंचायत के मुखिया पति शंभू राम को जिलाध्यक्ष बनाया। इसके बाद बहुजन समाज पार्टी ने करकोमा पंचायत के लखेया गांव निवासी नंदा पासवान को जिलाध्यक्ष बनाया और अब सबसे बड़ी पार्टी कहलाने वाली भाजपा ने भी मेराल प्रखंड के आरंगी गांव निवासी उदय कुमार कुशवाहा को पार्टी का जिलाध्यक्ष बना दिया है।

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