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मां शायर देवी धाम महोत्सव के आठवां दिन : “नारद लीला उर्फ यमराज का घमंड” नाटक का हुआ मंचन

प्रकृति का नियम अटल है, इसे यमराज या देवता भी नहीं बदल सकते

बलराम शर्मा
मेराल । प्रसिद्ध मां शायर देवी धाम का छठा वार्षिक महोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। महोत्सव के आठवां दिन गुरुवार की रात्रि में “नारद लीला उर्फ यमराज का घमंड” नाटक का मंचन जय बजरंग ड्रामा पार्टी के स्थानीय युवा कलाकारों द्वारा किया गया। श्यामलाल कुशवाह द्वारा रचित नाटक का अरविंद महतो और रंजीत कुमार के निर्देशन में मंचन किया गया। नाटक में दिखाया गया कि यमराज को अपने आप पर घमंड बढ़ता देख देवर्षि नारद जी ने उनके घमंड को तोड़ने के लिए उन्हें जिंदा आदमी को यमलोक लाने की शर्त लगा दी, जो संभव नहीं था। संगीतमय इस नाटक से लोगों को बताया गया कि प्रकृति के अटल नियमों को कोई नहीं बदल सकता, यहां तक कि यमराज या देवता भी नहीं। परिवर्तन और कर्म का फल तथा मृत्यु, प्रकृति के वो नियम हैं, जो सभी के लिए समान और अपरिवर्तनीय हैं।

नाटक के माध्यम से लोगों को बताया गया कि किसी के बातों पर आसानी से विश्वास न करते हुए पहले उसके बातों को परखें, समझे तब विश्वास करें। अपने आप पर ज्यादा विश्वास करते हुए घमंड नहीं करने, वरना राजा से रंक बनने में देरी नहीं लगेगा। नाटक में यमराज की भूमिका श्यामलाल कुशवाहा, नारद का रंजीत कुमार, चित्रगुप्त का जितेंद्र रजक, ब्रह्मा का चंदेश्वर महतो, विष्णु का सिकंदर कुमार, शंकर का संतोष रजक ने शानदार अभिनय किया। जबकि सहायक पात्र के रूप में अरविंद महतो, राम जी कुशवाह, श्रवण महतो, कृष्ण कुमार, अरविंद कुमार आदि ने शानदार रौल अदा किया।

कार्यक्रम शुभारंभ के अवसर पर देवी धाम के मंच पर पहुंचे मेराल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अनिल शाह का स्वागत अध्यक्ष विजय प्रसाद के द्वारा फूलमाला, बुके और अंग वस्त्र देकर किया गया। इस अवसर पर समिति के लोगों के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिला-पुरुष व बच्चे दर्शकों ने देर रात्रि तक सांस्कृतिक आयोजन का लुफ्त उठाया।

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