एसडीएम संजय कुमार ने मेराल के प्रसिद्ध मां शायर देवी धाम के वार्षिकोत्सव पर आयोजित आठ दिवसीय नाटक कला मंच का किया उद्घाटन
नाटक कला मंचन से सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने के प्रयास की प्रशंसा की

देवी धाम में मत्था टेक कर लिया आशीर्वाद, मेराल सहित पूरे क्षेत्र का विकास और सुख शांति का किया कामना
बलराम शर्मा
मेराल । प्रखंड मुख्यालय के प्रसिद्ध मां शायर देवी धाम के छठे वार्षिक महोत्सव के अवसर पर गुरुवार की रात्रि में आठ दिवसीय नाट्य कला मंच का उद्घाटन गढ़वा सदर एसडीएम संजय कुमार ने फीता काटकर और दीप जलाकर किया। उन्होंने देवी धाम के वार्षिक महोत्सव के अवसर पर दस दिवसीय भव्य आयोजन के लिए देवी धाम संचालन समिति के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम सभी के सामूहिक प्रयास और सहयोग से ही संभव हो पाता है।

एसडीएम श्री पांडे ने नाटक कला मंचन से सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने के प्रयास की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा नाट्य कला मंचन में आम जनमानस को नाट्य के माध्यम से सामाजिक मर्यादा और संस्कृति का संदेश दिया जाता है। उन्होंने कहा कि नाटक कला मंचन को सिर्फ मनोरंजन का साधन न समझें इससे राम, कृष्णा के आदर्श की सीख लेनी चाहिए। उन्होंने बड़ी संख्या में उपस्थित दर्शकों की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि कार्यक्रम में आपकी उपस्थिति भी किसी कलाकार से काम नहीं है। लोगों की उपस्थिति से कलाकारों को अपनी कला दिखाने में बल मिलता है। उद्घाटन मंच का संचालन मुख्य संरक्षक संजय भगत द्वारा किया गया। मौके पर देवी धाम पंचवर्षीय कार्यक्रम के अध्यक्ष विजय प्रसाद ने एसडीएम श्री पांडे से मां शायर देवी धाम को पर्यटन स्थल के रूप में डी श्रेणी से ऊपर लाकर धाम परिसर को विकसित करने के प्रयासों को गति देने में सहयोग के लिए आग्रह किया गया।

इससे पहले श्री पांडे का स्वागत फूलमाला, बुके, अंग वस्त्र और पगड़ी पहनाकर गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। यहां पहुंचने पर सबसे पहले एसडीएम श्री पांडे ने देवी धाम मंदिर में मत्था टेक कर आशीर्वाद लिया और मेराल सहित पूरे क्षेत्र के विकास और सुख समृद्धि का कामना किया। उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्य संरक्षक प्रेमचंद प्रसाद, मुखिया रामसागर महतो, मुन्ना राम, मोतीचंद प्रसाद, रविंद्र प्रसाद वर्मा, रुपू महतो, विनोद कुशवाहा, अरविंद महतो, धनंजय चौधरी, बलराम कृष्ण शर्मा, वीरेंद्र प्रसाद सहित कई गणमान्य के साथ बड़ी संख्या में महिला पुरुष व बच्चे दर्शन शामिल थे।




