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आनंदमार्गियों ने मनाया दधीचि दिवस

भागवत धर्म की स्थापना के लिए अपने संन्यासियों द्वारा दिए गए सर्वोच्च बलिदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए 12 घंटे का रखा उपवास

बलराम शर्मा  

गढ़वा । आनंद मार्गियो द्वारा भागवत धर्म की स्थापना के लिए उन बहादुर संन्यासियों (16 भिक्षु और 1 भिक्षुणी) को याद करते हुए, जिन्होंने धर्म की रक्षा के लिए 30 अप्रैल 1982 को अपना जीवन न्यौछावर कर दिया था उनके सर्वोच्च बलिदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए 12 घंटे का निर्जला उपवास रख कर साधन, भजन एवं सत्संग का आयोजन आनंद मार्ग आश्रम सह जागृति केंद्र में दधीचि दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर साधकों द्वारा दृढ़ प्रतिज्ञा लिया कि इस धरती पर भागवत धर्म की स्थापना, साधना-सेवा और त्याग के माध्यम से करते हुए विवेकशील, नैतिकवान और समरसता युक्त जो आडंबर, अंधविश्वास से रहित नवयमान्वता वाद के सिद्धांत पर आधारित” सदविप्र समाज” का निर्माण करेंगे। बताया गया कि जिनका जीवन भागवत धर्म की स्थापना और विकास के लिए मानव शरीर का त्याग होता है उन्हें दधीचि कहा जाता है। मौके पर जिला भुक्ति प्रधान धर्मेंद्र देव ने सभी से विश्वकल्याण हेतु आनंद मार्ग के संपूर्ण जीवन दर्शन को अपनाने एवं जन-जन तक पहुंचाने का अपील किया। उन्होंने कहा कि आज विश्व युद्ध जैसी विध्वंसक परिस्थितियों का सामना कर रहा है, जिसका समाधान प्राउत में है। इस अवसर वरिष्ठ मार्गी राम जन्म जी, डॉ रामानुज प्रसाद, कैलाश प्रसाद, दिनेश प्रसाद, हरिद्वार, अनुप देव, मनोज देव, ज्योतिर्मय देव, इंद्रजीत देव, सुधांशु देव, सुचित लाल, राजेश देव एवं आरती आदि शामिल थे।

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