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गढ़वा में राजनीतिक पार्टियों के समर्थित की होगी जीत या स्वतंत्र प्रत्याशी के सिर पर बंधेगा ताज

मतदान के बाद राजनीतिक पार्टियों के समर्थित और स्वतंत्र प्रत्याशियों की बढ़ी बेचैनी, हार-जीत के समीकरणों पर मंथन शुरू

बलराम शर्मा 

गढ़वा । नगर परिषद चुनाव का मतदान संपन्न होने के बाद अब सभी प्रत्याशियों, राजनीतिक पार्टियों और उनके समर्थकों के बीच हार-जीत की चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। मतदान केंद्रों के हिसाब से वोट का गुणा गणित को लेकर मंथन का दौर जारी है, लेकिन इस बार के चुनाव में भीतरघात और बदले हुए समीकरणों ने प्रत्याशियों के साथ-साथ राजनीतिक पार्टियों के नेताओं की नींद उड़ा दी है। जमीनी हकीकत से अलग सभी कर रहे दावे  मतदान के बाद समर्थकों द्वारा जीत का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन प्रत्याशी जमीनी हकीकत को लेकर आशंकित हैं। बैलेट पेपर से हुए मतदान के कारण इस बार रद्द मतों की संख्या अधिक होने की संभावना जताई जा रही है, जो प्रत्याशियों और राजनीतिक पार्टियों के लिए चिंता का विषय है। सोशल मीडिया और फोन के जरिए प्रत्याशी लगातार अपने समर्थकों से फीडबैक ले रहे हैं। लेकिन दिल है की मानता नहीं। वोट के समीकरण से सभी को बेचैनी महसूस हो रही है और उन्हें दिलासा दिया जा रहा है कि आप 100% निकल रहे हैं। लेकिन यह बातें उन्हें धरातल की सच्चाई से अलग नजर आ रही है। अफवाहों और बैठकों का चल रहा दौर  शहर में अफवाहों का बाजार भी चरम पर है। कहीं धनबल के प्रभाव की चर्चा है, तो कहीं किसी खास इलाके में जाति विशेष का तो कहीं भय पैदा कर वोट प्रभावित करने की बातें कही जा रही है। अपनों द्वारा की गई कथित गद्दारी ने भी प्रत्याशियों और समर्थकों की बेचैनी बढ़ा दी है। अध्यक्ष पद के सभी 12 उम्मीदवार अपनी स्थिति भांप चुके हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। वे जनता की राय ले रहे हैं, लोगों से अपनी स्थिति पूछ रहे हैं कि मेरी स्थिति कैसी है। आपसे सच्चाई की उम्मीद है इसलिए आपसे ही पूछ रहा हूं, वरना मुझे तो पल-पल की सूचना मिलती रही है। हालांकि मतगणना तक बैठकों और समीक्षाओं का सिलसिला जारी रहेगा, जहां जीत के दावों के साथ-साथ भविष्य की चिंताएं भी जाहिर की जा रही हैं। जीत हार के विश्लेषण में 12 में से 7 प्रत्याशी मैदान से बाहर बताए जा रहे हैं, परंतु इन्हीं की वजह से जीत के दावे कर रहे राजनीति पार्टियों के समर्थित प्रत्याशीयों और जीत के दावेदारों का समीकरण गड़बड़ा रहा है। अब सभी को 27 फरवरी का इंतजार है, जब मतपेटियां खुलेगी और प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा।

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