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भाजपा को अपने वोट बैंक में सेंध लगने का है डर, आज गढ़वा पहुंचेंगे रघुवर

नप चुनाव में पूर्व और वर्तमान जनप्रतिनिधियों की प्रतिष्ठा दांव पर, राजनीति दलों की एंट्री से सभी प्रत्याशी बेचैन

बलराम शर्मा 

गढ़वा । नगर निकाय चुनाव की सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। यहां मुख्य मुकाबला अध्यक्ष पद को लेकर देखा जा रहा है, इसके लिए कुल 12 प्रत्याशी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। कोई जातीय समीकरण से तो कोई राजनीतिक दलों के समर्थन से तो कोई अपने सामाजिक कार्यों के प्रभाव से वोटरों को अपनी ओर आकर्षित करने से मुकाबला काफी दिलचस्प और बहुकोणीय होता दिख रहा है। दलीय आधार पर नहीं हो रहा नव चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों की इंट्री से मुकाबला रोचक हो गया है।भाजपा को अपने वोट बैंक में सेंध का डर : गढ़वा जेनरल नप क्षेत्र से भाजपा अपनी पार्टी नेत्री कंचन जायसवाल को चुनावी मैदान में उतारी है, जबकि वरिष्ठ भाजपा नेता पार्टी से बागी होकर चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे हैं। वहीं 7-8 वर्ष पूर्व से ही चुनाव लड़ने की मंशा से शहर में अपनी पहचान बनाने वाले दौलत सोनी भी अपने दर्जनों समर्थकों के साथ चुनाव में जीत का दंभ भर रहे हैं। अलख और दौलत के बढ़ते जनाधार से भाजपा समर्थित उम्मीदवार को अपने वोट बैंक में सेंध लगने का डर बढ़ गया है। हालांकि डेढ़ साल पूर्व हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी को गढ़वा शहरी क्षेत्र में अपेक्षा से ज्यादा वोट मिलने से ऐतिहासिक जीत मिली थी। हालांकि कंचन के पक्ष में विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी पार्टी नेताओं के साथ लगातार कैंपेन कर रहे हैं। बावजूद भाजपा को यहां अपने वोट बैंक में सेंध लगने का डर बना हुआ है यही वजह है कि आज भाजपा अपनी प्रत्याशी कंचन जायसवाल के पक्ष में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को मैदान में उतारने जा रही। वहीं दूसरी झामुमो ने पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष के पति संतोष केसरी को समर्थन दिया है। उनके प्रचार का कमान खुद गढ़वा के पूर्व विधायक और राज्य के पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर संभाले हुए हैं। वे भी जनसभाओं और घर-घर संपर्क अभियान के जरिए अपने समर्थित प्रत्याशी को जीत दिलाने में जुटे हैं। प्रत्याशी बेचैन, मतदाता मौन गढ़वा नप क्षेत्र में अध्यक्ष पद के लिए कुल 12 प्रत्याशी मैदान में हैं, सभी प्रत्याशी अपने हिसाब से मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने में जुटे हैं। चुनावी शोर के बीच शहर के मतदाता सभी प्रत्याशियों की बातों को सुन व समझ रहे हैं। मतदाताओं के मौन रहने से सभी प्रत्याशी बेचैन है।

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